उत्तराखंड के पवित्र संगम स्थल देवप्रयाग में रविवार, 29 मार्च 2026 को रा
ष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर के छठे दिन का आयोजन उत्साह, अनुशासन और सेवा भावना के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना, योगाभ्यास और लक्ष्य गीत से हुई, जिसने पूरे दिन की गतिविधियों के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।
दिन का मुख्य आकर्षण गंगा स्वच्छता अभियान रहा, जिसमें NSS के स्वयंसेवी छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। संगम तट पर एकत्र होकर सभी ने “निर्मल गंगा” का संकल्प लिया और इसे व्यवहार में उतारते हुए तट क्षेत्र में व्यापक सफाई अभियान चलाया। स्वयंसेवियों की इस पहल से न केवल क्षेत्र स्वच्छ हुआ, बल्कि स्थानीय लोगों में भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. महंत मौर्य ने गंगा नदी के उद्गम, उसकी प्रमुख सहायक नदियों और देवप्रयाग में अलकनंदा व भागीरथी के संगम के धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गंगा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक धरोहर भी है, जिसकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
वहीं नमामि गंगे परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. जी.पी. थपलियाल ने केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी देते हुए कहा कि “पारिस्थितिकी तंत्र की शुद्धता बनाए रखना ही भारत माता की सच्ची आराधना है।” उन्होंने स्वयंसेवियों को जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
स्वच्छता अभियान के बाद स्वयंसेवियों ने रघुनाथ मंदिर मार्ग पर “प्लास्टिक मुक्त भारत” विषय पर जन-जागरूकता रैली निकाली। इस रैली के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को गंगा प्रदूषण, प्लास्टिक के दुष्प्रभाव और कचरा प्रबंधन के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एस.के. भट्ट, डॉ. वेद निधि गोनियाल, वर्षा वर्मा और मीडिया प्रभारी सूरजपाल चौहान ने भी स्वयंसेवियों को संबोधित करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।
शाम के सत्र में पर्यावरण स्वच्छता विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दिन का समापन भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कैंप फायर के साथ हुआ, जिसने शिविर के माहौल को जीवंत और प्रेरणादायक बना दिया।
इस प्रकार NSS शिविर का यह दिन सेवा, जागरूकता और सांस्कृतिक समन्वय का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।







