टिहरी गढ़वाल: एनएसएस विशेष शिविर के दूसरे दिन श्रमदान और बौद्धिक सत्रों से गूंजा परिसर
टिहरी गढ़वाल, 25 मार्च।
चंद्रबदनी डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर के द्वितीय दिवस पर उत्साह, अनुशासन और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। दिन की शुरुआत सरस्वती वंदना, समूहगान और एनएसएस के लक्ष्य गीत के साथ हुई, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
शिविर के अंतर्गत आयोजित श्रमदान कार्यक्रम में स्वयंसेवी छात्र-छात्राओं ने ग्राम सैंकरी सैंण के पारंपरिक जल स्रोतों और जलाशयों की साफ-सफाई कर स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश दिया। स्वयंसेवियों ने न केवल श्रमदान किया, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को भी जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। इस दौरान छात्रों में टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना साफ झलकती रही। श्रमदान के बाद सभी स्वयंसेवियों ने सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया, जिससे आपसी समन्वय और भाईचारे की भावना मजबूत हुई।
दोपहर बाद आयोजित बौद्धिक सत्र में “पर्यावरण एवं वन” विषय पर मुख्य अतिथि वन विभाग के वन दरोगा श्री सुरेंद्र दत्त सेमवाल (देवप्रयाग) ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वनों में बढ़ती आग की घटनाओं, उनके कारणों और बचाव के उपायों पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को जागरूक किया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के महत्व और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा की। उनका संबोधन छात्रों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना सिंह ने भी समसामयिक सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आने का आह्वान किया और एनएसएस के माध्यम से व्यक्तित्व विकास के महत्व को रेखांकित किया।
शिविर के समापन सत्र में एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी श्री एस.के. भट्ट ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और स्वयंसेवियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शिविर छात्रों को समाज से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं।
इस अवसर पर वन विभाग के श्री अरविंद कुमार (वन दरोगा, माणिकनाथ रेंज), श्री आशीष सिंह, महाविद्यालय के डॉ. वेद निधि गोनियाल, डॉ. वर्षा वर्मा, श्री राकेश भट्ट सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे दिन चले कार्यक्रमों ने शिविर को ज्ञान, सेवा और संस्कार का सशक्त मंच बना दिया।




