बद्रीनाथ मंदिर दान विवाद: कांग्रेस बोली—सरकारी जांच नहीं, चाहिए न्यायिक जांच,बद्रीनाथ चढ़ावा विवाद पर कांग्रेस का बड़ा हमला

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Badrinath News

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बद्रीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद: कांग्रेस ने उठाए निष्पक्ष जांच पर सवाल, न्यायिक निगरानी में जांच की मांग तेज

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य की राजनीति गर्मा गई है। मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं होगी।

देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान बद्रीनाथ विधानसभा से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि आरोप सामने आने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य लोगों से जानकारी जुटाने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यदि मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि 23 अप्रैल से अब तक के सभी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं तथा पिछले वर्षों के चढ़ावे और दान के प्रबंधन की भी व्यापक जांच कराई जाए।

कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार द्वारा गठित जांच प्रक्रिया को पर्याप्त नहीं बताते हुए सर्वदलीय जांच समिति बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे। उनके अनुसार, आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि मंदिर में प्राप्त दान का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।

वहीं कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप ने भी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था या पदाधिकारी पर सवाल उठ रहे हैं तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेशभर में उठाएगी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जारी रखेगी।

गौरतलब है कि बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और स्वतंत्र होनी चाहिए, ताकि तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आ सकें और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

अब इस पूरे मामले में जांच समिति की रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह मामला धार्मिक आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा होने के कारण प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ आम श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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