

सहकारिता से समृद्धि: उत्तराखंड बना देश का अग्रणी पर्वतीय राज्य, किसानों की आय बढ़ाने में बना राष्ट्रीय मॉडल
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकारिता से समृद्धि” के विजन, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में किए गए व्यापक सुधारों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सक्रिय पहल के चलते उत्तराखंड आज देश के पर्वतीय राज्यों में सहकारिता के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है। डबल इंजन सरकार की नीतियों ने सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देते हुए इसे किसानों की आय बढ़ाने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बना दिया है।
पिछले कुछ वर्षों में सहकारिता क्षेत्र में हुए सुधारों का सबसे बड़ा लाभ उत्तराखंड को मिला है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा पर्वतीय राज्यों को प्रदान की गई कुल ₹422.95 करोड़ की वित्तीय सहायता में से ₹287.95 करोड़, यानी लगभग 68 प्रतिशत राशि अकेले उत्तराखंड को प्राप्त हुई। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सहकारिता के माध्यम से किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा भारतीय बीज सहकारी समिति (BBSSL), राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) और राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) जैसी संस्थाओं की स्थापना की गई। इनका उद्देश्य किसानों को आधुनिक बीज, बेहतर विपणन व्यवस्था, निर्यात के अवसर और जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने इन पहलों का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए सहकारिता सदस्यता और योजनाओं के लाभ उठाने में सभी पर्वतीय राज्यों में प्रथम स्थान हासिल किया है।
राज्य में अब तक किसानों को 2,488 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके साथ ही 417 मीट्रिक टन जैविक गेहूं, 40 मीट्रिक टन जैविक बासमती चावल और 30 मीट्रिक टन जैविक स्वीटनर्स की खरीद कर किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाया गया है। इससे जैविक खेती को नई ऊर्जा मिली है तथा उत्तराखंड के पारंपरिक और प्राकृतिक उत्पादों की पहचान राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत हो रही है। स्थानीय किसानों को विपणन की बेहतर सुविधाएं मिलने से उनकी आय में वृद्धि के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं का विस्तार कर रहे हैं। राज्य की 551 सहकारी समितियां BBSSL, 487 समितियां NCEL और 387 समितियां NCOL की सदस्य बन चुकी हैं। यह बढ़ती भागीदारी किसानों के सहकारिता मॉडल पर विश्वास और राज्य सरकार की प्रभावी कार्यशैली को दर्शाती है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक गांव तक सहकारिता की पहुंच सुनिश्चित कर ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को भी इससे जोड़ना है, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकें।
सहकारिता के माध्यम से कृषि, बागवानी, दुग्ध उत्पादन, जैविक खेती और स्थानीय उत्पादों के विपणन को नई गति मिली है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि पलायन रोकने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने और उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ रहे हैं।
आज उत्तराखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “सहकारिता से समृद्धि” का विजन, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की नीतियां और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नेतृत्व मिलकर विकास का नया अध्याय लिख रहे हैं। सहकारिता अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के लिए सहकारिता का आदर्श मॉडल बनने के साथ-साथ जैविक कृषि, बागवानी और स्थानीय उत्पादों के वैश्विक केंद्र के रूप में भी अपनी अलग पहचान स्थापित करने की ओर तेजी से अग्रसर है।