Tehri Garhwal 30 March 2026
गढ़वाल की पवित्र वादियों में स्थित श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के परिसर चंद्रबदनी (नैखरी) में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन सोमवार को अत्यंत उत्साह, ऊर्जा और सामाजिक सरोकारों के संदेश के साथ संपन्न हुआ। यह शिविर न केवल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का माध्यम बना, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को भी मजबूती से स्थापित कर गया।
समापन समारोह की अध्यक्षता परिसर के निदेशक-प्राचार्य डॉ. महेंद्र मौर्य ने की। कार्यक्रम का आयोजन सुव्यवस्थित ढंग से किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। पूरे सप्ताह चले इस शिविर में स्वयंसेवियों ने अनुशासन, समर्पण और टीमवर्क का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकालीन योग सत्र से हुई, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। योग प्रशिक्षक श्रीमती सरोज चौहान ने स्वयंसेवियों को योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक संतुलन और एकाग्रता भी विकसित होती है। स्वयंसेवियों ने पूरे उत्साह के साथ योग सत्र में भाग लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।
योग सत्र के बाद स्वयंसेवियों ने सामूहिक रूप से नाश्ता ग्रहण किया और तत्पश्चात परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। इस अभियान के तहत छात्रों ने परिसर के विभिन्न हिस्सों की सफाई की और स्वच्छता का संदेश दिया। स्वच्छ भारत मिशन की भावना को आत्मसात करते हुए विद्यार्थियों ने यह दिखाया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। इसके साथ ही विभिन्न सदनों के विद्यार्थियों ने बैठक व्यवस्था और कार्यक्रम संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में देवप्रयाग ब्लॉक प्रमुख उपस्थित रहे। उनके साथ झल्ड एवं झनाऊ ग्राम पंचायतों के प्रधान सहित कई गणमान्य अतिथि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसने कार्यक्रम को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। इसके बाद अतिथियों का पारंपरिक रूप से शॉल भेंट, बैज अलंकरण और स्मृति-चिन्ह देकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर एनएसएस स्वयंसेवियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। गढ़वाली लोकनृत्य, स्वागत गीत और देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और मंच संचालन की क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इन प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध किया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियां भी इसके महत्वपूर्ण अंग हैं।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में स्वयंसेवियों की सराहना करते हुए कहा कि एनएसएस जैसे कार्यक्रम युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, सहयोग, ईमानदारी और सेवा भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और ऐसे शिविर उन्हें सही दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम अधिकारी श्री यश के भट्ट ने शिविर के सात दिनों की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस दौरान स्वयंसेवियों ने स्वच्छता अभियान, जागरूकता रैलियां, वृक्षारोपण, ग्राम भ्रमण, स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने समाज की वास्तविक समस्याओं को समझा और उनके समाधान के लिए प्रयास किए।
स्वयंसेवियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस शिविर ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें आत्मनिर्भर, जिम्मेदार और समाज के प्रति संवेदनशील बनाया है। कई विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि उन्होंने पहली बार ग्रामीण जीवन को इतने करीब से देखा और वहां की चुनौतियों को समझा।
समापन अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वयंसेवियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। यह सम्मान उनके उत्साह और मेहनत को और बढ़ाने का कार्य करेगा। कार्यक्रम के अंत में निदेशक डॉ. महेंद्र मौर्य ने सभी अतिथियों, आयोजकों और स्वयंसेवियों का आभार व्यक्त किया और शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई दी।
इस अवसर पर नमामि गंगे के नोडल अधिकारी जी.पी. थपलियाल, डॉ. वेद निधि गोनयाल, डॉ. वंदना, डॉ. वर्षा वर्मा सहित सभी प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस कार्यक्रम को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कुल मिलाकर, यह सात दिवसीय एनएसएस विशेष शिविर विद्यार्थियों के लिए सीख, सेवा और संस्कार का अद्भुत संगम साबित हुआ। इसने न केवल युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया, बल्कि उन्हें एक बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी।





