1 अप्रैल से महंगाई का डबल वार! LPG सिलेंडर 200 रुपये तक महंगा

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LPG gas

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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की आम जनता पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले ने खासकर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग से जुड़े व्यवसायों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे उनकी लागत में सीधा इजाफा होने वाला है।

राजधानी दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 195.5 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है। वहीं कोलकाता में यह सिलेंडर 218 रुपये महंगा होकर 2,208 रुपये तक पहुंच गया है। चेन्नई में भी 203 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब यह 2,246.50 रुपये में मिल रहा है। मुंबई में इसकी कीमत बढ़कर 2,031 रुपये हो गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों को कुछ हद तक राहत मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई में आई अनिश्चितता है। खासकर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है।

भारत अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से आयात करता है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या आपूर्ति बाधित होती है, तो उसका सीधा असर भारत के ऊर्जा बाजार पर पड़ना तय है। हालात तब और गंभीर हो गए जब ईरान के ड्रोन हमलों के बाद कतर ने अपने एलएनजी उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया। कतर भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है और भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत वहीं से आयात करता है।

इन परिस्थितियों के चलते तेल कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया था। यही वजह है कि अप्रैल की शुरुआत में ही कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में इतनी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली। गौरतलब है कि तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार बदलाव करती हैं।

इससे पहले 7 मार्च को भी घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि कमर्शियल सिलेंडर भी उस समय 115 रुपये महंगा हुआ था। यानी पिछले कुछ समय से गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ता जा रहा है।

कमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने का सबसे बड़ा असर होटल और फूड इंडस्ट्री पर पड़ने वाला है। रेस्टोरेंट संचालकों, ढाबा मालिकों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की लागत बढ़ जाएगी। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बाहर खाना महंगा हो सकता है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, क्योंकि व्यवसायी बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल सकते हैं।

इसके अलावा शादी-ब्याह और बड़े आयोजनों पर भी इसका असर पड़ेगा। कैटरिंग सेवाएं महंगी हो सकती हैं, जिससे आम लोगों के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। पहले से ही महंगाई से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक और झटका साबित हो सकता है।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे महंगाई और बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

हालांकि सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि यदि वैश्विक हालात सुधरते हैं और कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होती है, तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है। लेकिन फिलहाल के हालात को देखते हुए निकट भविष्य में राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।

कुल मिलाकर, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक घटनाएं किस तरह सीधे आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करती हैं। गैस सिलेंडर की कीमतों में यह बढ़ोतरी सिर्फ एक शुरुआत हो सकती है, और अगर हालात नहीं सुधरे तो महंगाई का असर और भी गहरा हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में आम जनता को अपने खर्चों को लेकर और सतर्क रहने की जरूरत होगी।

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