15 दिन का ब्रेक या बड़ा सियासी संकेत? हरीश रावत के फैसले से हलचल तेज
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राजनीति से 15 दिन का ब्रेक लिया, ऐलान से सियासी हलचल तेज हुईउत्तराखंड की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने सक्रिय राजनीति से 15 दिनों का ब्रेक लेने का ऐलान किया। उन्होंने इसे अपने लंबे राजनीतिक जीवन का ‘अर्जित अवकाश’ बताया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सभी दल रणनीति बनाने में जुटे हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर भी हाल के दिनों में कुछ मतभेदों की खबरें सामने आई हैं, जिससे इस निर्णय के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि 60 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में लगातार सक्रिय रहने के बाद उन्होंने आत्ममंथन के लिए यह विराम लिया है। बिजली-पानी की बढ़ती कीमतों के विरोध में हाल ही में किए गए मौन व्रत के बाद उन्होंने इस निर्णय पर विचार किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान वे पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे, लेकिन सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल होते रहेंगे। साथ ही, वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों को लिखने पर भी ध्यान देंगे।
हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी असंतोष की बात नहीं कही, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे एक रणनीतिक संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। ऐसे में उनका यह ब्रेक उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले समय के संकेत देने वाला माना जा रहा है।


