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उत्तरकाशी। चिन्यालीसौड़ विकासखंड के खालसी-छेणद गांव में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। पिछले तीन दिनों से 38 से अधिक परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं और पंचायत भवन व सरकारी विद्यालयों में अस्थायी रूप से रह रहे हैं। पहाड़ी से लगातार बड़े-बड़े पत्थर गिरने और जमीन धंसने की आशंका के चलते ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
इसी बीच पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजलवान प्रभावित गांव पहुंचे और राहत शिविरों में रह रहे परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रत्येक परिवार की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा मौके पर मौजूद लोगों से आपदा से हुए नुकसान की जानकारी ली। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि लगातार बारिश के कारण उनके घरों के आसपास खतरा बढ़ गया है और सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
दौरे के दौरान दीपक बिजलवान ने कैबिनेट मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा से वीडियो कॉल के माध्यम से ग्रामीणों की सीधी बातचीत कराई। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं सीधे मंत्री के समक्ष रखीं। इसके बाद मंत्री सौरभ बहुगुणा ने ग्राम पंचायत छेणद के लिए जिला योजना मद से ₹10 लाख की आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने और प्रशासन को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने का भरोसा भी दिया।
दीपक बिजलवान ने कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में प्रभावित परिवार अकेले नहीं हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की प्रत्येक जायज मांग को प्रशासन और सरकार तक पूरी मजबूती के साथ पहुंचाया जाएगा तथा स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि राहत राशि की घोषणा और प्रशासनिक प्रयासों से पुनर्वास कार्यों में तेजी आएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों का गांव पहुंचकर हालात का जायजा लेना और प्रभावित परिवारों से संवाद करना उनके लिए भरोसा बढ़ाने वाला कदम है। फिलहाल सभी की निगाहें राहत और पुनर्वास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी हैं, ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

