उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल ट्रेक पर 29 मई 2026 से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता चल रही रामनगर निवासी बबीता पांडे की तलाश लगातार जारी है। पुलिस, वन विभाग, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की संयुक्त टीम ने अब नटीण के दुर्गम और घने जंगलों में संभावित भालू आवासीय क्षेत्रों तक पहुंचकर विशेष खोज अभियान शुरू किया है।
मंगलवार को सीओ जनक सिंह पंवार और सीओ बड़कोट चंचल शर्मा के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने दयारा ट्रेक के बाईं ओर स्थित नटीण क्षेत्र के घने जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जंगल के भीतर बने पानी के टैंकों, संदिग्ध स्थानों और पहले से चिन्हित खुदे हुए क्षेत्रों की दोबारा जांच की गई। टीम ने कई स्थानों पर पानी डालकर पुनः खुदाई भी की, ताकि किसी संभावित सुराग का पता लगाया जा सके।
अब तक नहीं मिला कोई सुराग
बबीता पांडे की तलाश में पिछले लगभग एक महीने से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) और हेलीकॉप्टर की मदद से दयारा बुग्याल और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक खोजबीन की जा चुकी है, लेकिन अब तक बबीता का कोई पता नहीं चल पाया है।
इसी बीच अपहरण की आशंका को देखते हुए पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तकनीकी जांच भी शुरू की थी, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।
कौन हैं बबीता पांडे?
बबीता पांडे नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली हैं और एमबीए की छात्रा हैं। वह अपने परिवार में सबसे बड़ी संतान हैं तथा दो भाइयों की इकलौती बहन हैं। उनके दोनों भाई हर्षित पांडे और तनुज पांडे रामनगर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। परिवार में माता-पिता और दादी भी हैं।
कैसे हुई थीं लापता?
जानकारी के अनुसार बबीता पांडे अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थीं। उन्होंने हर्षिल, लामा टॉप और गंगोत्री धाम का भ्रमण करने के बाद दयारा बुग्याल ट्रेक की यात्रा शुरू की थी। तीनों गोई कैंप में ठहरे हुए थे। बताया जाता है कि 29 मई की रात करीब 11 बजे बबीता टेंट से बाहर निकली थीं, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
फिलहाल प्रशासन और विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त टीम लगातार क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही है और हर संभावित स्थान की बारीकी से जांच की जा रही है। बबीता की तलाश को लेकर परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीदें अब भी बरकरार हैं।

