पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की सप्लाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। दरअसल, भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60 फीसदी और एलएनजी की आधे से ज्यादा मांग आयात के जरिए पूरी करता है, जिसमें खाड़ी देशों की अहम भूमिका है। ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता का असर अब देश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है।
कई शहरों और ग्रामीण इलाकों से एलपीजी सिलेंडर की कमी और कालाबाजारी की खबरें सामने आ रही हैं। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, क्योंकि उपभोक्ताओं में यह डर है कि आने वाले दिनों में सप्लाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन खबरों को लेकर साफ किया है कि देश में एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि घबराहट में ज्यादा बुकिंग होने की वजह से मांग अचानक बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है।
13 मार्च को देश के प्रमुख शहरों में एलपीजी के दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं। दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये में मिल रहा है। वहीं पटना में इसकी कीमत 1002.50 रुपये तक पहुंच गई है।
उधर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में पेट्रोल 103.50 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
ऊर्जा बाजार में चिंता की एक बड़ी वजह हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर पैदा हुआ संकट है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्गों में से एक माना जाता है। हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि अब देश करीब 70 फीसदी कच्चा तेल वैकल्पिक समुद्री मार्गों से मंगाने लगा है, जो पहले लगभग 55 फीसदी था। सरकार का दावा है कि इन वैकल्पिक इंतजामों से ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि आम उपभोक्ताओं पर किसी बड़े संकट का असर न पड़े।