उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उत्तरकाशी जिले के यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। यहां एक बीमार बुजुर्ग महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए परिजन और ग्रामीणों को मजबूरी में उसे स्ट्रेचर और कंधों के सहारे खतरनाक जंगलों के रास्तों से कई किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ा।
बताया जा रहा है कि इलाके में आज भी सड़क सुविधा नहीं है, जिसके कारण आपात स्थिति में न एम्बुलेंस पहुंच पाती है और न ही कोई वाहन। जब किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाती है तो ग्रामीणों के पास मरीज को कंधों पर उठाकर अस्पताल तक ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। 21वीं सदी में भी पहाड़ के कई गांवों की यही सच्चाई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरतली से नाला मोटर मार्ग को लेकर सरकार की ओर से वर्षों पहले स्वीकृति मिल चुकी है। जानकारी के मुताबिक इस मोटर मार्ग की मंजूरी 26 मई 2014 को दी गई थी। लगभग 3 किलोमीटर लंबे इस सड़क मार्ग के निर्माण के लिए करीब 27.03 लाख रुपये की लागत भी तय की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 11 साल बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि अगर समय रहते सड़क बन जाती तो आज किसी बुजुर्ग या बीमार महिला को इस तरह जंगलों के रास्तों से स्ट्रेचर पर ढोकर अस्पताल नहीं ले जाना पड़ता।
अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विकास के दावों के बीच पहाड़ के लोगों को मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी। स्थानीय जनता ने सरकार से जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की है, क्योंकि पहाड़ में सड़क सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि कई बार किसी की जिंदगी बचाने का एकमात्र सहारा होती है। 🚨


