ब्रेकिंग न्यूज | पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए रेलवे में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
भारतीय रेलवे और भारतीय सेना ने देश के पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। दोनों संस्थानों ने सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों को मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क ऑफ कोऑपरेशन लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य सैन्य सेवा पूरी करने के बाद जवानों को रेलवे में व्यवस्थित रोजगार, पुनर्वास और दीर्घकालिक करियर अवसर उपलब्ध कराना है।
नई नीति के तहत रेलवे में पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए पद-स्तर के आधार पर आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। पूर्व सैनिकों को लेवल-1 पदों में 20% और लेवल-2 व उससे ऊपर में 10% आरक्षण मिलेगा, जबकि पूर्व अग्निवीरों को लेवल-1 में 10% और उच्च स्तरों में 5% आरक्षण दिया जाएगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केवल 2024-25 में ही पूर्व सैनिकों के लिए 14,788 पद आरक्षित किए जा चुके हैं, जो इस योजना के बड़े पैमाने को दर्शाता है।
नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक रेलवे ने अंतरिम व्यवस्था के तहत पूर्व सैनिकों को अनुबंध आधार पर ‘पॉइंट्समैन’ के रूप में नियुक्त करना शुरू किया है। देशभर के विभिन्न जोन और मंडलों में लेवल-1 के 5,000 से अधिक पदों पर भर्ती जारी है, जबकि नौ रेलवे डिवीजनों ने सेना के साथ MoU पर हस्ताक्षर कर प्रक्रिया को सरल बनाया है।
यह सहयोग केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहेगा। सेना के जवानों का अनुशासन, तकनीकी दक्षता और परिचालन अनुभव रेलवे के आधुनिकीकरण और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगा। दूसरी ओर अग्निपथ योजना के तहत 4 वर्ष सेवा के बाद लगभग 25 वर्ष की आयु में लौटने वाले अग्निवीरों को स्थिर नागरिक करियर का मार्ग मिलेगा।
रेलवे-सेना की यह संयुक्त पहल देश में सैन्य-से-नागरिक करियर संक्रमण का सबसे बड़ा मॉडल बन सकती है—जिससे वेटरन्स को आर्थिक सुरक्षा और भारतीय परिवहन तंत्र को प्रशिक्षित, अनुशासित मानव संसाधन दोनों मिलेंगे।