चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर उतरे 4 हेलीकॉप्टर, चीन सीमा के पास IAF ने शुरू किया सैन्य अभ्यास

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सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को यहां 12 दिवसीय विशेष अभ्यास के तहत वायुसेना के दो एएलएच (एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर) और दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर पहुंचे, जिन्होंने रनवे पर लैंडिंग और टेकऑफ का सफल अभ्यास किया।

भारत-चीन सीमा के निकट स्थित होने के कारण चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डा सामरिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। उत्तरकाशी जनपद में भागीरथी घाटी के बीच स्थित यह हवाई पट्टी पर्वतीय क्षेत्रों में त्वरित सैन्य तैनाती, आपदा राहत और रसद आपूर्ति के लिए आदर्श है। यही वजह है कि भारतीय वायुसेना समय-समय पर यहां अपने परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग-टेकऑफ क्षमता का परीक्षण करती रहती है।

फरवरी के प्रथम सप्ताह में भी वायुसेना ने अपने बहुउद्देशीय परिवहन विमान एएन-32 से यहां अभ्यास किया था। अब सैन्य सूत्रों के अनुसार 12 दिवसीय विस्तृत अभ्यास कार्यक्रम के तहत आगरा एयरबेस से आए हेलीकॉप्टरों ने पहले गौचर (चमोली) में लैंडिंग की और उसके बाद चिन्यालीसौड़ पहुंचकर पर्वतीय हवाई पट्टी संचालन का अभ्यास किया।

प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे को वायुसेना के सुपुर्द करने का निर्णय लिए जाने के बाद यहां सैन्य गतिविधियां और तेज होने लगी हैं। वायुसेना इसे भविष्य में एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में विकसित करना चाहती है, जिससे सीमांत क्षेत्रों में त्वरित ऑपरेशन संभव हो सकें।

एमआई-17 मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर लगभग 32 सैनिकों या 4 हजार किलोग्राम तक भार ले जाने में सक्षम है और सैनिक परिवहन से लेकर आपदा राहत तक व्यापक उपयोग में आता है। केदारनाथ आपदा के दौरान भी इस हेलीकॉप्टर ने हजारों लोगों के बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं एएलएच-ध्रुव भारत का स्वदेशी मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने विकसित किया है और यह सियाचिन व लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से संचालन में सक्षम है।

कुल मिलाकर चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर वायुसेना का यह अभ्यास न केवल सामरिक तैयारियों को मजबूत कर रहा है, बल्कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और त्वरित सैन्य पहुंच की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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