उत्तरकाशी में अनोखा प्रदर्शन: कूड़ा लेकर पहुँचे आंदोलनकारी, व्यवस्था पर सवाल

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तांबाखानी का कूड़ा नगर पालिका अध्यक्ष के घर पहुँचा — उत्तरकाशी में फूटा जनआक्रोश

उत्तरकाशी में कूड़ा निस्तारण को लेकर चल रहा जनआंदोलन अब उग्र जनआक्रोश का रूप लेता जा रहा है। लंबे समय से तांबाखानी सुरंग क्षेत्र में कूड़ा डंप किए जाने का विरोध कर रहे स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने आज एक अनोखे और प्रतीकात्मक विरोध के जरिए प्रशासन को कड़ा संदेश दिया। आंदोलनकारियों ने सुरंग के बाहर फैले कूड़े को स्वयं उठाया और उसे सीधे नगर पालिका अध्यक्ष के आवास तक पहुंचाकर विरोध दर्ज कराया। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला भी था, जो बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस समाधान देने में विफल रही है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि तांबाखानी सुरंग क्षेत्र को लंबे समय से अस्थायी डंपिंग जोन बना दिया गया है, जिससे आसपास के गांवों, जलस्रोतों और पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बरसात के दिनों में कूड़े का रिसाव और दुर्गंध लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा न तो वैज्ञानिक कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की गई है और न ही वैकल्पिक डंपिंग स्थल की पहचान की गई है। परिणामस्वरूप पूरा शहर कूड़ा संकट से जूझ रहा है।

आज के इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व विधायक प्रत्याशी प्रतापनगर सागर भंडारी, अजय पवार, वरिष्ठ यूकेडी नेता विष्णु पाल सिंह रावत, यूकेडी जिलाध्यक्ष संतोष सेमवाल, संदीप रावत, जितेंद्र, अनुराग रांगड़, सुनील कुमार, विनोद ब्रह्मचारी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

नेताओं ने कहा कि उत्तरकाशी एक धार्मिक और पर्यटन नगरी है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे शहर में कूड़े के ढेर और अव्यवस्थित डंपिंग न केवल शहर की छवि को धूमिल कर रहे हैं, बल्कि गंगा और हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए भी खतरा बन रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक उदासीनता और योजना की कमी के कारण यह समस्या विकराल होती जा रही है।

आंदोलनकारियों ने मांग की है कि तांबाखानी क्षेत्र में तुरंत कूड़ा डंपिंग बंद की जाए, वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू की जाए, और स्थायी ट्रेंचिंग ग्राउंड या प्रोसेसिंग प्लांट की व्यवस्था की जाए। साथ ही नगर पालिका और जिला प्रशासन द्वारा जनता के साथ खुला संवाद स्थापित कर समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करने की भी मांग उठाई गई।

आज का यह विरोध स्पष्ट संकेत है कि उत्तरकाशी की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है। यदि जनभावनाओं की अनदेखी जारी रही तो यह आंदोलन आने वाले समय में बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए उत्तरकाशी को कूड़ा संकट से मुक्ति दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

उत्तरकाशी में अनोखा प्रदर्शन: कूड़ा लेकर पहुँचे आंदोलनकारी, व्यवस्था पर सवाल

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