उत्तराखंड में एंट्री हुई महंगी, दूसरे राज्यों की गाड़ियों पर लगेगा नया शुल्क
चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले उत्तराखंड सरकार ने एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है। अब दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूला जाएगा। इसके लिए राज्य के 15 बॉर्डर एंट्री प्वाइंट चिन्हित किए जा चुके हैं, जहां यह शुल्क लिया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।
पहाड़ों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला, बाहरी गाड़ियों से लिया जाएगा पर्यावरण शुल्क
आसान शब्दों में समझें तो ग्रीन सेस एक पर्यावरण शुल्क है। जब बाहरी राज्यों की गाड़ियां उत्तराखंड में प्रवेश करती हैं तो इससे प्रदूषण बढ़ता है, पहाड़ी सड़कों पर दबाव बढ़ता है और ट्रैफिक की समस्या भी गहराती है। उत्तराखंड एक पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील और पर्वतीय राज्य है, जहां प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार का कहना है कि जो वाहन यहां आकर सड़कों और अन्य संसाधनों का उपयोग करते हैं, उन्हें पर्यावरण संरक्षण और सड़क रखरखाव के लिए आर्थिक योगदान देना चाहिए। यही योगदान ग्रीन सेस के रूप में लिया जाएगा।
इस फैसले का सीधा संबंध चारधाम यात्रा से भी है। हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी निजी और व्यावसायिक गाड़ियों से उत्तराखंड पहुंचते हैं, जिससे यातायात और प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। सरकार का कहना है कि ग्रीन सेस से मिलने वाली राशि का उपयोग सड़कों के रखरखाव, ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था सुधारने और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में किया जाएगा।
शुल्क की दरें भी तय कर दी गई हैं। निजी हल्की गाड़ी से 80 रुपये, 12 सीट से अधिक वाली बस से 140 रुपये और 7 एक्सल वाले भारी वाहन से 700 रुपये लिए जाएंगे। हालांकि सरकारी वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, दोपहिया, तिपहिया, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस सेस से छूट दी गई है।
आरटीओ देहरादून संदीप सैनी ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान बाहरी राज्यों से आने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य रहेगा। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। आवेदन, शुल्क भुगतान, कागजात और टैक्स की जांच डिजिटल माध्यम से होगी। QR कोड से भुगतान, एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए ग्रीन कार्ड डाउनलोड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। हालांकि पहली बार वाहन की फिटनेस जांच परिवहन कार्यालय में करानी होगी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य की आय बढ़ेगी, पर्यावरण को सुरक्षा मिलेगी और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता आएगी। अब देखना होगा कि चारधाम यात्रा से पहले लागू की जा रही यह नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।