अल्मोड़ा की बेटी बनी फ्रांस के दूल्हे राजा की दुल्हन, पहाड़ी रीति रिवाज से हुई शादी

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देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चीनाखान की निवासी श्रीपूर्णा जोशी ने फ्रांस के और्हेल्यै गुरेलिएन के साथ पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कर भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के सुंदर संगम की अनोखी मिसाल पेश की। 12 फरवरी को कसारदेवी क्षेत्र स्थित एक भव्य रिसॉर्ट में आयोजित यह समारोह कुमाऊं की सांस्कृतिक गरिमा और अंतरराष्ट्रीय मेल का साक्षी बना।


वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे

विवाह पूर्ण रूप से वैदिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे, वरमाला और कन्यादान की रस्में विधि-विधान से निभाई गईं। पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार की गूंज और पारंपरिक संगीत की मधुर ध्वनि ने समारोह को आध्यात्मिक आभा प्रदान की।


ढोल-दमाऊं और छोलिया नृत्य से सजी बारात

ढोल-दमाऊं की थाप और छोलिया नृत्य दल के साथ निकली बारात ने आयोजन को पूरी तरह कुमाऊंनी रंग में रंग दिया। फ्रांस से आए 25 से अधिक मेहमान भारतीय परिधानों में नजर आए। विदेशी महिलाओं ने साड़ी, घाघरा-चोली और कुमाऊंनी पिछौड़ा धारण किया, जबकि पुरुष मेहमान कुर्ता-पजामा और शेरवानी में सजे दिखाई दिए। स्थानीय लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया।


शिक्षा और संस्कारों का सुंदर संगम

श्रीपूर्णा जोशी, ओएनजीसी से सेवानिवृत्त अधिकारी ध्रुव रंजन जोशी और प्रतिभा जोशी की पुत्री हैं। उन्होंने दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में स्नातक, भारतीय विद्या भवन से टेलीविजन एवं फिल्म प्रोडक्शन में स्नातकोत्तर तथा ग्राफिक डिजाइन में डिप्लोमा किया है। उच्च शिक्षा के लिए वह फ्रांस गईं, जहां एक कंपनी में कार्यरत रहीं और वहीं और्हेल्यै गुरेलिएन से उनकी मुलाकात हुई।




🌍 फ्रांस से अल्मोड़ा तक प्रेम की कहानी

दुल्हन के पिता ध्रुव रंजन जोशी ने बताया कि प्रारंभ में बेटी को दूर भेजने को लेकर मन में संकोच था, लेकिन फ्रांस जाकर जब उन्होंने और्हेल्यै के परिवार से मुलाकात की तो परिवार के संस्कार और अपनापन देखकर आश्वस्त हो गए। इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से विवाह तय हुआ।


कुमाऊं की संस्कृति से रूबरू हुए विदेशी मेहमान

दूल्हे और्हेल्यै ने कहा कि अल्मोड़ा की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक वातावरण और स्थानीय परंपराओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। पहाड़ी व्यंजन, लोक संगीत और पारंपरिक आतिथ्य ने विदेशी मेहमानों को कुमाऊंनी संस्कृति से परिचित कराया।

यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो देशों और दो संस्कृतियों के आत्मीय मिलन का प्रतीक बन गया है। अल्मोड़ा में संपन्न यह अनोखा समारोह अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और देवभूमि के लिए गर्व का क्षण भी।वभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चीनाखान की निवासी श्रीपूर्णा जोशी ने फ्रांस के और्हेल्यै गुरेलिएन के साथ पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कर भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के सुंदर संगम की अनोखी मिसाल पेश की। 12 फरवरी को कसारदेवी क्षेत्र स्थित एक भव्य रिसॉर्ट में आयोजित यह समारोह कुमाऊं की सांस्कृतिक गरिमा और अंतरराष्ट्रीय मेल का साक्षी बना।


वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे

विवाह पूर्ण रूप से वैदिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे, वरमाला और कन्यादान की रस्में विधि-विधान से निभाई गईं। पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार की गूंज और पारंपरिक संगीत की मधुर ध्वनि ने समारोह को आध्यात्मिक आभा प्रदान की।


ढोल-दमाऊं और छोलिया नृत्य से सजी बारात

ढोल-दमाऊं की थाप और छोलिया नृत्य दल के साथ निकली बारात ने आयोजन को पूरी तरह कुमाऊंनी रंग में रंग दिया। फ्रांस से आए 25 से अधिक मेहमान भारतीय परिधानों में नजर आए। विदेशी महिलाओं ने साड़ी, घाघरा-चोली और कुमाऊंनी पिछौड़ा धारण किया, जबकि पुरुष मेहमान कुर्ता-पजामा और शेरवानी में सजे दिखाई दिए। स्थानीय लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया।


शिक्षा और संस्कारों का सुंदर संगम

श्रीपूर्णा जोशी, ओएनजीसी से सेवानिवृत्त अधिकारी ध्रुव रंजन जोशी और प्रतिभा जोशी की पुत्री हैं। उन्होंने दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में स्नातक, भारतीय विद्या भवन से टेलीविजन एवं फिल्म प्रोडक्शन में स्नातकोत्तर तथा ग्राफिक डिजाइन में डिप्लोमा किया है। उच्च शिक्षा के लिए वह फ्रांस गईं, जहां एक कंपनी में कार्यरत रहीं और वहीं और्हेल्यै गुरेलिएन से उनकी मुलाकात हुई।




🌍 फ्रांस से अल्मोड़ा तक प्रेम की कहानी

दुल्हन के पिता ध्रुव रंजन जोशी ने बताया कि प्रारंभ में बेटी को दूर भेजने को लेकर मन में संकोच था, लेकिन फ्रांस जाकर जब उन्होंने और्हेल्यै के परिवार से मुलाकात की तो परिवार के संस्कार और अपनापन देखकर आश्वस्त हो गए। इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से विवाह तय हुआ।


कुमाऊं की संस्कृति से रूबरू हुए विदेशी मेहमान

दूल्हे और्हेल्यै ने कहा कि अल्मोड़ा की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक वातावरण और स्थानीय परंपराओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। पहाड़ी व्यंजन, लोक संगीत और पारंपरिक आतिथ्य ने विदेशी मेहमानों को कुमाऊंनी संस्कृति से परिचित कराया।

यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो देशों और दो संस्कृतियों के आत्मीय मिलन का प्रतीक बन गया है। अल्मोड़ा में संपन्न यह अनोखा समारोह अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और देवभूमि के लिए गर्व का क्षण भी।

पहाड़ की बेटी बनी विदेशी दुल्हन

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