मोहम्मद दीपक’ ने ठुकराए मंत्री इरफ़ान अंसारी के 2 लाख रुपये! बोले- ‘इंसानियत के लिए किया था काम, इनाम के लिए नहीं’

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कोटद्वार से सामने आए ‘मोहम्मद दीपक’ प्रकरण ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। हाल ही में एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होकर चर्चा में आए जिम संचालक दीपक कुमार ने झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा घोषित 2 लाख रुपये की सहायता राशि लेने से साफ इनकार कर दिया है। दीपक के इस फैसले के बाद यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फिर से चर्चा का विषय बन गया है।
दरअसल, 42 वर्षीय दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ उस वक्त सुर्खियों में आए थे, जब कोटद्वार के पटेल मार्ग पर बजरंग दल के कुछ सदस्यों और एक मुस्लिम दुकानदार के बीच विवाद हो रहा था। विवाद के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और मौके पर भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान दीपक कुमार ने हस्तक्षेप करते हुए दुकानदार का पक्ष लिया और भीड़ को समझाने की कोशिश की। गुस्से और भावनाओं के आवेग में उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ कह दिया। इस पूरी घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। इसके बाद दीपक रातों-रात राष्ट्रीय स्तर की खबरों में छा गए।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दीपक की सराहना करते हुए अपने वेतन से 2 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। मंत्री ने इसे इंसानियत और भाईचारे की मिसाल बताया था। हालांकि दीपक कुमार का कहना है कि उन्हें इस घोषणा की जानकारी भी सोशल मीडिया के जरिए ही मिली। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे यह राशि स्वीकार नहीं करेंगे। दीपक के अनुसार, 2 लाख रुपये एक बड़ी रकम है और यदि यह पैसा किसी जरूरतमंद, गरीब या दिव्यांग व्यक्ति की मदद में लगाया जाए तो ज्यादा सार्थक होगा।
दीपक कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने जो कुछ भी किया, वह किसी इनाम, प्रचार या शोहरत के लिए नहीं था। उनका कहना है कि उस वक्त उन्होंने केवल एक इंसान होने के नाते हस्तक्षेप किया था। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती नफरत और तनाव के बीच अगर कोई गलत के खिलाफ खड़ा होता है, तो उसे राजनीति या पैसों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
घटना के बाद कई राजनीतिक नेताओं ने भी दीपक का समर्थन किया। पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और हरक सिंह रावत सहित कई नेताओं से मुलाकात की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। हालांकि दीपक कुमार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वे राजनीति से पूरी तरह दूर रहना चाहते हैं। उन्होंने सभी नेताओं का समर्थन और शुभकामनाओं के लिए आभार जरूर जताया।
पूरे मामले को लेकर कोटद्वार में तनाव की स्थिति भी देखने को मिली थी। 31 जनवरी को बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने दीपक के जिम के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान नारेबाजी और विरोध हुआ, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने दीपक कुमार और प्रदर्शन कर रहे लोगों, दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
दीपक कुमार का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि गुस्से में कही गई एक बात इतना बड़ा विवाद और चर्चा का कारण बन जाएगी। वे चाहते हैं कि मामला जल्द शांत हो और लोग इंसानियत, भाईचारे और आपसी समझ को प्राथमिकता दें। उनके इस रुख ने एक बार फिर समाज में मूल्यों और संवेदनशीलता को लेकर बहस छेड़ दी है।

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