उत्तराखंड का फौजी जवान शहीद, कोयंबटूर में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए नायक महावीर सिंह रावत

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उत्तराखंड का जवान महावीर सिंह रावत शहीद

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महावीर सिंह रावत

यह समाचार समूचे उत्तराखण्ड के लिए बेहद पीड़ादायक और भावुक कर देने वाला है। तमिलनाडु के कोयंबटूर से आई इस दुखद खबर ने हर देशप्रेमी के मन को झकझोर कर रख दिया है। ड्यूटी के दौरान तैनात डिफेंस सिक्योरिटी कोर के नायक महावीर सिंह रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। देश सेवा में जीवन समर्पित करने वाले इस जांबाज सैनिक का अचानक इस तरह चला जाना न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 51 वर्षीय नायक महावीर सिंह रावत का 5 फरवरी को कोयंबटूर में ड्यूटी के दौरान अचानक हृदय गति रुकने से निधन हो गया। घटना की सूचना मिलते ही उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सेना की सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उनके पार्थिव शरीर को पहले कोयंबटूर से दिल्ली लाया गया और फिर रविवार को इंडिगो की फ्लाइट के माध्यम से देहरादून एयरपोर्ट पहुंचाया गया।

जैसे ही तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर विमान से बाहर लाया गया, एयरपोर्ट पर मौजूद परिजनों की आंखें भर आईं। वहां का माहौल बेहद गमगीन हो गया। देहरादून एयरपोर्ट पर रायवाला से पहुंची भारतीय सेना की टुकड़ी ने नायक महावीर सिंह रावत को पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अनुशासित सलामी, राष्ट्रध्वज को नमन और शोक की गूंज के बीच यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया। इस दौरान “भारत माता की जय” के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

सैन्य सम्मान के उपरांत उनका पार्थिव शरीर जॉलीग्रांट स्थित कोठारी मोहल्ला में उनके आवास ले जाया गया। वहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, रिश्तेदार और परिचित जुटे। हर कोई इस सच्चे सैनिक को अंतिम बार देखने और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए भावुक नजर आया। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

नायक महावीर सिंह रावत भारतीय सेना में एक अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित सैनिक के रूप में जाने जाते थे। वर्तमान में वे डिफेंस सिक्योरिटी कोर में नायक के पद पर कार्यरत थे, जबकि इससे पूर्व उन्होंने कई वर्षों तक गढ़वाल राइफल्स में सेवाएं देकर देश की सीमाओं की रक्षा की। उनका सैन्य जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा रहा है।

परिजनों के अनुसार, नायक महावीर सिंह रावत का अंतिम संस्कार हरिद्वार में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा। एक सच्चे सिपाही को अंतिम विदाई देने की तैयारियों के बीच गांव और क्षेत्र के लोग गहरे दुख के साथ उन्हें याद कर रहे हैं। उनका बलिदान और सेवा सदैव देशवासियों के दिलों में अमर रहेगी। आप

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