उत्तरकाशी में डुंडा बाजार बनेगा “ऊनी बाजार”, ब्लॉक प्रमुख की बड़ी पहल

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स्लग-डुंडा बाजार को मिलेगी नई पहचान, ब्लॉक प्रमुख ने की पहल शुरू।

रिपोर्ट-बलबीर परमार, उत्तरकाशी।

एंकर-उत्तरकाशी जनपद का डुंडा बाजार अब केवल एक सामान्य बाजार नहीं रहेगा, बल्कि “ऊनी बाजार” के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पारंपरिक ऊनी वस्त्रों को प्रोत्साहन देने और स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से डुंडा ब्लॉक में अधिकारियों, व्यापारियों और ऊन व्यवसाय से जुड़े लोगों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस पहल से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। क्या है पूरी योजना और किसे होगा इसका सबसे अधिक लाभ, देखिए यह खास रिपोर्ट।

वीओ-01-उत्तरकाशी जिले का डुंडा बाजार लंबे समय से जाड़-भोटिया समुदाय की आजीविका का केंद्र रहा है। यह समुदाय पीढ़ियों से भेड़-बकरी पालन और ऊनी वस्त्र निर्माण के पारंपरिक कार्य से जुड़ा हुआ है। यहां स्वेटर, शॉल, टोपी, जुराबें और दस्ताने जैसे कई ऊनी उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जो अपनी गुणवत्ता और पारंपरिक डिजाइन के लिए जाने जाते हैं। बावजूद इसके, इन उत्पादों को अब तक स्थायी बाजार और व्यापक पहचान नहीं मिल सकी थी। इसी समस्या के समाधान के लिए डुंडा ब्लॉक प्रमुख राजदीप की पहल पर एक अहम बैठक बुलाई गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी, स्थानीय व्यापारी और ऊन व्यवसाय से जुड़े लोग शामिल हुए। बैठक में सुझाव लिए गए कि किस प्रकार डुंडा बाजार को योजनाबद्ध तरीके से “ऊनी बाजार” के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यहां के उत्पादों को स्थायी मंच और बेहतर विपणन सुविधा मिल सके।

बाइट-राजदीप, ब्लॉक प्रमुख डुंडा।


गौरतलब है कि जाड़-भोटिया समुदाय को पारंपरिक ऊनी उद्योग की रीढ़ माना जाता है। यह समुदाय भेड़-बकरी से प्राप्त ऊन को साफ कर, कातकर और बुनकर हाथों से ऊनी वस्त्र तैयार करता है। हालांकि बाजार और मार्केटिंग के अभाव में इन उत्पादों को उचित दाम नहीं मिल पाते, जिससे कारीगरों का उत्साह भी प्रभावित होता है। स्थानीय व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनक पाल बिष्ट और ग्रामीण कमल सिंह नेगी ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि डुंडा बाजार को आधिकारिक रूप से ऊनी बाजार के रूप में विकसित किया जाता है, तो उत्पादों को उचित मूल्य मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

वीओ-03-ब्लॉक प्रमुख की इस पहल से क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। प्रस्तावित योजना के तहत स्थायी दुकानों की व्यवस्था, ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार के साथ बाहरी बाजारों से सीधा संपर्क स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि डुंडा बाजार को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिल सकती है। कुल मिलाकर यह पहल परंपरा, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अब देखना यह होगा कि यह योजना जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता से लागू हो पाती है।

डुंडा बाजार बनेगा “ऊनी बाजार”, ब्लॉक प्रमुख की बड़ी पहल

डुंडा बाजार बनेगा “ऊनी बाजार”, ब्लॉक प्रमुख की बड़ी पहल

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