उत्तराखंड में राशन घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, 6000 अपात्रों के कार्ड निरस्त

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देहरादून। उत्तराखंड में गरीबों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ खाद्य आपूर्ति विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले दो महीनों में 6000 अपात्र राशन कार्ड निरस्त कर दिए हैं। यह कार्रवाई राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत की गई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सस्ता सरकारी राशन लेने वालों में आयकर दाता, बड़े बैंक लोन धारक और लग्जरी कारों के मालिक तक शामिल थे।

केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर माह में ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के जरिए देहरादून जिले के करीब 25 हजार संदिग्ध राशन कार्ड धारकों की सूची राज्य को भेजी गई थी। सूची मिलने के बाद जिला पूर्ति विभाग ने सत्यापन अभियान चलाया। जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में ऐसे परिवार योजना का लाभ ले रहे थे जो तय आय सीमा से कहीं अधिक संपन्न थे। कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर भी राशन उठाया जा रहा था, जिससे गरीबों के हिस्से का अनाज प्रभावित हो रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ केवल उन परिवारों को मिलना चाहिए जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। योजना के तहत प्रति यूनिट 5 किलो खाद्यान्न—3 किलो चावल ₹3 प्रति किलो और 2 किलो गेहूं ₹2 प्रति किलो—प्रति माह उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन जांच में सामने आया कि नियमों को दरकिनार कर फर्जी तरीके से कार्ड बनवाए गए और वर्षों से सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाया जा रहा था।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान अभी जारी रहेगा और अपात्र पाए जाने वाले सभी कार्ड निरस्त किए जाएंगे। साथ ही पात्र गरीब परिवारों को प्राथमिकता से योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में अपात्र व्यक्ति राशन योजना का लाभ लेते दिखें तो इसकी सूचना विभाग को दें, ताकि गरीबों का अधिकार सुरक्षित रखा जा सके।

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