24 साल देश की सेवा, गांव पहुंचते ही हुआ फौजी का ऐतिहासिक स्वागत

उत्तराखंड का ये गांव बना देशभक्ति की मिसाल, जवान का भव्य स्वागत…
उत्तराखंड के एक पहाड़ी गांव में उस समय खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला जब भारतीय सेना से 24 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हवलदार कुंदन सिंह अपने पैतृक गांव पहुंचे। लंबे समय तक देश की सीमाओं पर तैनात रहकर मातृभूमि की रक्षा करने वाले इस वीर सपूत के स्वागत के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। जैसे ही उनके गांव पहुंचने की सूचना मिली, गांव की गलियों में चहल-पहल बढ़ गई और लोग अपने काम छोड़कर स्वागत की तैयारियों में जुट गए।
गांव को फूलों, झंडियों और सजावट से सुसज्जित किया गया था। ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ जब हवलदार कुंदन सिंह गांव में दाखिल हुए तो हर ओर देशभक्ति का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने फूल बरसाकर, मालाएं पहनाकर और जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी इस पल के साक्षी बने। कई लोग भावुक नजर आए तो कई ने खुशी में नृत्य कर अपने जज्बात जाहिर किए।
हवलदार कुंदन सिंह ने अपने 24 साल के सैन्य जीवन में देश की विभिन्न सीमाओं पर सेवा दी। बर्फीले इलाकों से लेकर दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों तक उन्होंने हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य का पालन किया। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि कुंदन सिंह ने हमेशा गांव और परिवार का नाम रोशन किया है और उनकी सेवा पर पूरे क्षेत्र को गर्व है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे सैनिकों की वजह से ही आज देश सुरक्षित महसूस करता है।
स्वागत कार्यक्रम के दौरान गांव के लोगों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सेना में सेवा करना आसान नहीं होता। घर-परिवार से दूर रहकर कठिन हालात में ड्यूटी करना साहस और समर्पण की मांग करता है। कुंदन सिंह जैसे जवान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। कई युवाओं ने भी इस अवसर पर सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने की इच्छा जताई।
सेवानिवृत्त हवलदार कुंदन सिंह गांव वालों के इस स्नेह और सम्मान से भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। उन्होंने अपने गांव और क्षेत्र के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीमाओं पर तैनात हर सैनिक को अपने गांव और अपनों के ऐसे ही प्यार से ताकत मिलती है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति को जीवन में अपनाने की अपील भी की।
कार्यक्रम के अंत में गांव में सामूहिक रूप से देशभक्ति गीत गाए गए और लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की। यह स्वागत केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि उस त्याग, समर्पण और बलिदान का सम्मान था जो हर सैनिक देश के लिए करता है। पहाड़ के इस छोटे से गांव ने यह साबित कर दिया कि यहां आज भी देश के वीर सपूतों के लिए अपार सम्मान और गर्व की भावना मौजूद है।
सेना से सेवानिवृत्त जवान को मिला ऐसा सम्मान, देखने लायक नज़ारा



