देहरादून: उत्तरायणी कौथिग महोत्सव के समापन में भावुक हुईं गीता धामी, सीएम धामी बोले– संस्कृति हमारी पहचान
उत्तरायणी कौथिग महोत्सव के मंच से छलके गीता धामी के आंसू, सीएम धामी ने संस्कृति बचाने का आह्वान

देहरादून। परेड ग्राउंड में आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिग महोत्सव का समापन समारोह भावनात्मक क्षणों का साक्षी बना, जब सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी मंच पर अपने उद्बोधन के दौरान भावुक हो गईं। पति मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अपनी सास माता बिशना देवी का जिक्र करते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जिससे पूरा पंडाल भावनाओं से भर उठा।
गीता धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने आज तक एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली। उन्होंने पूरे प्रदेश को अपना परिवार मानकर सेवा की है। “जिन्होंने अपना निजी जीवन, परिवार और आराम सब कुछ प्रदेश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया, उनके लिए उत्तराखंड ही उनका परिवार है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नकल विरोधी कानून लागू कर राज्य के करीब 26 हजार परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरियां मिलीं, वहीं समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर उत्तराखंड ने देश को नई दिशा दिखाई है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तरायणी कौथिग महोत्सव उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करता है। उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी लोक परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीत और छोलिया, पांडव, झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा हैं, जिनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार नकारात्मक माहौल का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड आज देश की अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो रहा है। साफ नीति और नेक नीयत के बल पर राज्य ने हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने बताया कि गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देकर लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के मामले में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है और युवाओं को रोजगार देने के क्षेत्र में भी राज्य अग्रणी बनकर उभरा है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, कपकोट विधायक सुरेश गड़िया, रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, विधायक खजानदास, गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, भाजपा संगठन महामंत्री अजय कुमार, पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, डीजीपी दीपम सेठ, राज्यसभा सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट, उत्तराखंड संस्कृति साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल पद्मभूषण भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड की परंपराओं और संस्कृति से विशेष लगाव है। मातृशक्ति आज देश और प्रदेश को निरंतर आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।
गीता धामी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ संस्कृति का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। जब तक संस्कृति जीवित है, तब तक हमारी पहचान और सम्मान बना रहेगा। हमारी सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृति है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।