


राज्य आंदोलनकारियों ने राज्यसभा में उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी और कोटद्वार के बेटे दीपक को न्याय दिलाने की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए इमरान प्रतापगढ़ी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इमरान प्रतापगढ़ी ने संसद के उच्च सदन में इन मामलों को संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ उठाया, वह न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संदेश है।
इस मौके पर राकेश राणा और सैयद मुसरफ़ अली ने कहा कि उत्तराखंड से जुड़े पांच लोकसभा सांसद और तीन राज्यसभा सांसद केंद्र की सत्तासीन सरकार में होने के बावजूद कभी भी न तो अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को मजबूती से उठा सके और न ही कोटद्वार के बेटे दीपक के साथ हुए अन्याय को संसद में प्रभावी ढंग से रखा। उन्होंने यह भी कहा कि धराली से लेकर थराली तक आई आपदाओं में जिन परिवारों ने अपनों को खोया, जिन लोगों ने अपना घर-बार गंवाया, उनकी पीड़ा और समस्याओं को भी इन जनप्रतिनिधियों ने कभी संसद के पटल पर गंभीरता से नहीं रखा।
राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि इमरान प्रतापगढ़ी ने न केवल अंकिता भंडारी प्रकरण में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की, बल्कि कोटद्वार के दीपक को कथित रूप से सरकार के नुमाइंदों द्वारा प्रताड़ित किए जाने के मामले को भी मजबूती से उठाया। इसके साथ ही उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में बहन-बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार, अन्याय और दुराचार के खिलाफ भी संसद में अपनी आवाज बुलंद की।
उन्होंने कहा कि आज देश में सत्ता के नशे में चूर कुछ लोग जाति, धर्म, मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों के नाम पर समाज में नफरत और जहर फैलाने का काम कर रहे हैं। ऐसे माहौल में इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा मानवता, न्याय और समानता की बात करना युवाओं और आम जनता के लिए उम्मीद की किरण है। राज्य आंदोलनकारियों का कहना था कि इमरान प्रतापगढ़ी आज हिंदुस्तान में युवाओं के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और उनकी आवाज देश के हर उस व्यक्ति की आवाज है, जो न्याय और इंसाफ में विश्वास रखता है।
कार्यक्रम के अंत में राज्य आंदोलनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी इमरान प्रतापगढ़ी इसी तरह उत्तराखंड और देश के वंचित, पीड़ित और शोषित लोगों की आवाज संसद में उठाते रहेंगे और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करते रहेंगे।